दीदी यह बात कहकर हंसती हुई सीधी बाथरूम में चली गई और जीजा जी उनके कमरे से बाहर जाते ही तुरंत मुझे अपनी बाहों जकड़कर किस लेने लगे और वो मेरे बूब्स को भी ज़ोर ज़ोर से दबाने लगे. दोस्तों मुझे उनके ऊपर उनकी ऐसी हरकत की वजह से बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन में क्या कर सकती थी, क्योंकि उनको मेरी दीदी ने जो हाँ कर दिया था और में भी उस समय पूरी तरह से जवान थी और मेरे अंदर भी सेक्स भड़क रहा था, इसलिए में उनका ज्यादा विरोध नहीं कर रही थी.
अब जीजाजी ने मेरी तरफ से कोई भी विरोध ना देखकर उनकी हिम्मत ज्यादा बढ़ गई और उस बात का उन्होंने फायदा उठाते हुए मेरी टी-शर्ट को उतारना चाहा, लेकिन मैंने मना कर दिया और उनसे कहा कि क्या आपका दिमाग खराब हो गया है, अगर कोई आ गया तो क्या होगा? प्लीज अब आप मुझे छोड़ दो, लेकिन तभी जबरदस्ती उन्होंने मेरी कोई भी बात को ना सुनकर एक ज़ोर का झटका देकर मेरी टी-शर्ट को उतारने की जगह खींचकर फाड़ दिया और ब्रा को भी ज़ोर से पकड़कर खींचकर उसके हुक को तोड़ दिया.
में ऊपर से उनके सामने पूरी नंगी थी और अपने बूब्स को अपने हाथों से छुपाने की कोशिश करने लगी. अब वो जबरदस्ती करते हुए मेरे गोरे गोरे बूब्स को अब कुत्ते की तरह चूसने लगे. वो उन पर टूट पड़े और बिल्कुल पागल हो चुके थे, लेकिन दोस्तों मुझे तो कैसे भी करके अब उनका लंड देखना था, इसलिए मैंने अपनी तरफ से बिल्कुल विरोध को बंद करके उनकी टेंट बनी हुई पेंट को पकड़ लिया और मैंने उनके लंड को बिना देर किए जल्दी से बाहर निकाल लिया. अब जीजाजी और में हम दोनों पूरे नंगे होकर खड़े थे.
मेरे हाथ में उनका तनकर खड़ा हुआ लंड था और उनके मुहं में मेरे एक बूब्स की निप्पल तो दूसरी निप्पल को वो अपने एक हाथ से कसकर निचोड़ रहे थे. हम दोनों उस समय पूरे जोश में थे और हमें बड़े मज़े आ रहे थे, लेकिन तभी अचानक से हमारा मज़ा खराब करने के लिए मेरी दीदी ना जाने कहाँ से आ गई. वो हम दोनों को उस हालत में देखकर बिल्कुल चकित रह गई. फिर उन्होंने मुझे कसकर एक थप्पड़ मार दिया, जिसकी वजह से मेरा सारा सेक्स का नशा उस एक ही थप्पड़ में झट से टूट गया.
में अपने पूरे होश में आ चुकी थी कि में क्या कर रही थी. मुझे वो सब कुछ अच्छी तरह से समझ में आ गया. फिर जीजाजी ने गुस्से में आकर मेरी दीदी को भी एक थप्पड़ मार दिया और वो बोले कि साली रंडी तुझे नहीं पसंद तो तू इसको भी क्यों मना कर रही है? इसको तो मेरे साथ मज़ा लेने दे और इतना कहने के बाद जीजा जी ने मेरी दीदी के कपड़े जबरदस्ती उतारकर अपने खड़े लंड को उन्होंने दीदी की चूत में बहुत बेरहमी से एक जोरदार धक्का देकर अंदर डाल दिया, लेकिन उनका आधा ही लंड दीदी की चूत के अंदर गया था और दीदी दर्द की वजह से बहुत ज़ोर से चिल्ला रही थी. वो दर्द से तड़प रही थी.
फिर यह सब कुछ अपनी आखों के सामने देखकर मेरी चूत से पानी बाहर आ गया. एक तो में पहले से ही बहुत गरम थी और दूसरा मेरी दीदी की चुदाई मेरे सामने होने लगी, जिसकी वजह से में बिल्कुल पागल हो चुकी थी. सब कुछ मेरी समझ से बाहर था कि में क्या करूं? तभी मेरी बैचेनी को मेरे जीजाजी झट से समझ गए और वो मुझे अपनी तरफ खींचकर मेरी चूत में ज़ोर ज़ोर से अपनी दो उँगलियों को डालकर मेरी भी चुदाई करने लगे, जिसकी वजह से मेरी चूत अब कुछ ज्यादा ही व्याकुल हो उठी.
यह कहानी आप
Hotsexstory.xyz में पढ़ रहे।
में वो सब किसी भी शब्दों में लिखकर आप लोगों को नहीं बता सकती कि में उस समय कैसा और क्या महसूस कर रही थी. अब मैंने समय को देखते हुए तुरंत अपनी दीदी से आग्रह किया कि प्लीज दीदी मेरे भी अंदर डालने दो ना और दीदी उस समय अपनी चुदाई होने के साथ साथ रो रही थी.
फिर जीजा ने मुझे पकड़ा और वो मुझे नीचे लेटाकर मेरे दोनों पैरों को ऊपर उठाकर उन्होंने दीदी की चूत से खींचकर अपना लंड बाहर किया और अब वो धीरे से अपने लंड को मेरी चूत में डालने लगे. में बिना हलचल किए उनके सामने पड़ी रही और वो मेरी चूत पर अपने लंड का हल्का हल्का दबाव बनाते हुए लंड को अंदर करने लगे.
दोस्तों सिर्फ़ उनके लंड का टोपा ही मेरी चूत के अंदर गया था, लेकिन उसकी वजह से ही मुझे बहुत दर्द हो रहा था. में उस असहनीए दर्द से तड़पने लगी और सिसकियाँ ले रही थी आईईईईइ माँ में मर गई उफ्फ्फ्फफ्फ प्लीज थोड़ा धीरे करो मुझे बहुत दर्द हो रहा है, लेकिन मेरे बेरहम जीजा ने कुछ भी ना सुनते हुए अपना लंड मेरी चूत के अंदर पूरा डाल ही दिया. वो अब जमकर धक्के देकर मेरी चुदाई करने लगे और तब जीजाजी, में और दीदी सब नंगे पूरी रात तक बारी बारी से मज़े ले रहे थे और अब तो दीदी की बारी थी.