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अल्फ़ाज़ों का इश्क़

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चैनल जानकारी

चैनल जानकारी
चैनल का नामअल्फ़ाज़ों का इश्क़
यूज़रनेम@alfaazon_ka_ishq
श्रेणीप्रेरणादायक उद्धरण
भाषाहिन्दी
देशभारत
सदस्य153
चैनल प्रकारपब्लिक चैनल
बनाया गया22 अप्रैल 2026
आखिरी अपडेट17 अक्टू॰ 2026 • 7 दिन पहले
स्थितिसक्रिय

रैंकिंग

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भाषा रैंकिंग
#3353-2
श्रेणी रैंकिंग
#2061+3

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🥀💔

किसी का मैं ख़ास हूँ, कोई मेरा ख़ास है,
कितनी झूठी बात है, कैसी बकवास है।

मतलब की दुनिया को बस यही रास है,
जिससे है मतलब, बस वही तो ख़ास है।

चेहरों पे मुस्कान है, दिल में मगर प्यास है,
हर शख़्स अपनी ही ख़ुशी का गुमान लिए उदास है।

जब तक जेब भरी रही, हर तरफ़ विश्वास है,
खाली हाथ क्या हुए, हर रिश्ता निराश है।

सच बोलकर देखिए, हर कोई ख़फ़ा-सा है,
झूठ की महफ़िल में सच कितना लावारिस है।

वक़्त ने सिखला दिया, कैसा ये एहसास है,
अपने भी अपने नहीं, बस यही इतिहास है।

अब न किसी से गिला, न किसी से आस है,
दिल को यही समझा लिया, तन्हाई ही ख़ास है।


✍🏿 शिवा
246006
🥀💔

मेरी मोहब्बत को तुम क्या आज़माओगे,
दिल की हर धड़कन में खुद को ही पाओगे।

मेरी मोहब्बत तो सितारों जैसी है,
क्या तुम उन सितारों को गिन पाओगे।

रातों की ख़ामोशी में मेरा नाम सुनोगे,
चाहकर भी ख़ुद को कहाँ बचा पाओगे।

इश्क़ की राहों में आसान कुछ भी नहीं,
एक क़दम चलोगे तो सौ दर्द उठाओगे।

मैंने हर दुआ में बस तुझको माँगा है,
तुम किसी और को कैसे अपना बनाओगे।

मेरी वफ़ाओं का हिसाब माँगोगे अगर,
उम्र भर काग़ज़ों पर लिखते ही जाओगे।

दूर रहकर भी जो दिल से उतरता नहीं,
उस एहसास को भला कैसे मिटाओगे।

जब कभी तन्हाई का मौसम घिर आएगा,
मेरी यादों के दिए ख़ुद ही जलाओगे।

टूटकर चाहने वालों की यही किस्मत है,
एक दिन मेरी मोहब्बत को समझ जाओगे।

'शायर' की तरह इश्क़ किया है मैंने,
तुम मेरी ग़ज़ल पढ़कर मुस्कुराओगे।

✍🏿 शिवा
322005
🥀💔


इक तरफ़ तेरा होना, इक तरफ़ तेरा न होना,
इसी उलझन में गुज़रती रही मेरी ज़िंदगी।

✍🏿 शिवा
292006
🥀💔

वो जो उतरा है मेरी नज़रों से,
कभी उसकी नज़र उतारी थी हमने।

जिसके लहजे में रूह बसती थी,
अपनी ख़ामोशियाँ भी हारी थी हमने।

उसके चेहरे पे एक उजाला था,
अपनी रातों से लौ उधारी थी हमने।

वो जो कहता था साथ मरने का,
उसकी हर बात पर गुज़ारी थी हमने।

एक धागा था ऐतबारों का,
उम्र भर जिसकी रखवाली थी हमने।

जब भी दुनिया ने हमको तोड़ा था,
उसके सीने में पनाह ली थी हमने।

फिर वो बदला तो यूँ बदल बैठा,
जैसे पहचान ही उतारी थी हमने।

अब भी दिल में धुआँ-सा उठता है,
कोई बस्ती कभी सँवारी थी हमने।

अब मोहब्बत भी इक इबादत है,
जिसमें खुद अपनी हार मानी थी हमने।

✍🏿 शिवा
354005
🥀💔

ज़माने से थककर जो लौटे हैं घर को,
उन्हें क्या ख़बर, घर भी बदलते होंगे।

जो घरों से ही थककर निकलते हैं चुपचाप,
वो किस दर पे जाकर सँभलते होंगे।

किसी की हँसी में जो शामिल नहीं हैं,
वो तन्हाइयों में ही जलते होंगे।

जिन्हें नींद आती नहीं रात भर अब,
वो यादों के तकियों पे ढलते होंगे।

नज़र जिनकी हर मोड़ पर भीगी-सी है,
कई हादसे दिल में पलते होंगे।

जो कहते हैं “सब ठीक है” मुस्कुराकर,
वो अंदर ही अंदर बिखरते होंगे।

किसी को तो मिलती होगी एक पनाह भी,
मगर कुछ मुसाफ़िर भटकते होंगे।

ज़माने से थककर जो लौटे हैं घर को,
जो घरों से ही थकते होंगे — कहाँ लौटते होंगे।

✍🏿 शिवा
282006
🥀💔

दर्द की शिद्दत से शर्मिंदा नहीं,
दोस्त गहरे थे तो ज़ख़्म भी गहरे मिले।

हमने जिन लोगों को साँसों में बसाया बरसों,
वो ही महफ़िल में हमें अजनबी ठहरे मिले।

रूह तक काँप गई जब किसी ने नाम लिया,
कुछ पुराने से धुएँ दिल के भीतर मिले।

इश्क़ क्या था — कोई इल्ज़ाम था शायद हम पर,
जितने अपने थे सभी हाथ में पत्थर मिले।

हमने हर दर्द को चुपचाप दुआ समझा था,
फिर भी तक़दीर में वीरान मुक़द्दर मिले।

एक उम्मीद थी — कोई तो समझेगा हमें,
पर जहाँ भी गए, किरदार के सौ चेहरे मिले।

रात भर टूटते रिश्तों की सदा आती रही,
नींद के शहर में बस ख़्वाब अधूरे मिले।

हमने सीखा ही नहीं लोगों से बदला लेना,
बस इसी बात पे दुनिया से हमें ताने मिले।

अब भी सीने में कई क़ब्र-से सन्नाटे हैं,
अब भी आँखों को कई हिज्र के डेरे मिले।

दर्द की शिद्दत से शर्मिंदा नहीं,
दोस्त गहरे थे तो ज़ख़्म भी गहरे मिले।

✍🏿 शिवा
248006
🥀💔

तेरी यादें काँच के टुकड़े, मेरा इश्क़ नंगे पाँव,
हर गली से गुज़र रहा हूँ, ख़ून में डूबे पाँव।

तू मिला भी तो जैसे बारिश, रेत पर दो पल ठहरी,
मैं समंदर की तरह तन्हा, ढूँढता फिरता गाँव।

दिल ने हर दर्द चुपके-चुपके, तेरे नाम कर डाला,
लोग कहते रहे मुसाफ़िर, मुस्कुराता है जनाब।

रात भर चाँद से शिकायत, तेरी बातें करता हूँ,
नींद के दर पे बैठा रहता, आँख में लेकर घाव।

तेरी ख़ामोशियाँ भी अक्सर, चीख़ बन जाती हैं अब,
मैं जिसे सुकून समझा था, वो ही निकला इक दाव।

इश्क़ की राह में हमने तो, ख़ुद को ऐसे खोया है,
जैसे मंदिर में जलता दीपक, ख़ुद ही होता ख़ाक।

अब भी तेरी गली से गुज़रूँ, दिल धड़क उठता है,
तेरी यादें काँच के टुकड़े, मेरा इश्क़ नंगे पाँव।


✍🏿 शिवा
237006
🥀💔

अब वो मुझसे दूर ही रहते हैं,
शायद किसी ने उसे समझाया बहुत है।

मेरी बातों में जो अपनापन था कभी,
उसने हर लफ़्ज़ को झुठलाया बहुत है।

मैंने चाहा था उसे टूटकर उम्र भर,
उसने मिलने से भी कतराया बहुत है।

अब तो ख़ामोश निगाहों में धुआँ सा है,
दिल ने अंदर ही अंदर जलाया बहुत है।

वो जो कहता था “तू मेरी दुनिया है”,
आज उसी ने मुझे पराया बहुत है।

मैंने हर दर्द को हँसकर छुपा तो लिया,
ज़ख्म ने रातों में रुलाया बहुत है।

अब “शिवा” भी दुआ क्या करे उसके लिए,
जिसने हर मोड़ पे तड़पाया बहुत है।

✍🏿 शिवा
252004
💔🥀


गुज़र गई है मगर रोज़ याद आती है,
वो एक शाम जिसे भूलने की हसरत है।

वो शाम जैसे रगों में धुआँ उतर आया,
हर एक साँस में अब जलने की हसरत है।

कभी जो नाम था दिल की धड़कनों का सुकून,
उसी को आज सदा के लिए खोने की हसरत है।

वो जिस्म-ओ-जाँ पे ठहरी हुई-सी ख़ामोशी,
उसी ख़ला में बिखर जाने की हसरत है।

जो ख़्वाब आँख में पनपे थे तेरी आहट से,
उन्हीं को नींद में दफ़नाने की हसरत है।

तेरे ही ज़िक्र से भर जाता है ये सन्नाटा,
मगर उसी को लबों से छुपाने की हसरत है।

ये कैसा दर्द है, जो मर के भी नहीं जाता,
उसी अज़ाब में उम्र बिताने की हसरत है।

वो एक लम्हा, जो सदियों से कम नहीं लगता,
उसी में फिर से ठहर जाने की हसरत है।

‘शिवा’ अब तो ख़ुद से मुलाक़ात भी अज़ाब लगे,
उसी फ़रेब में उम्र बिताने की हसरत है।


✍🏿 शिवा
118002
💔🥀

ये कैसा इश्क़ था तेरा — न मुकम्मल, न ही आधा,
बस एक लम्हा मिला… और उम्र भर का बिखर जाना।

दिल ने चाहा तुझे जैसे कोई मन्नत अधूरी,
तू मिला भी तो लगा जैसे कोई ख़्वाब ठहर जाना।

तेरे वादों की चमक आज भी आँखों में बसी है,
जैसे बारिश में कहीं धूप का चुपके से उतर जाना।

मैंने हर मोड़ पे चाहा कि तुझे भूल ही जाऊँ,
पर तेरा नाम रहा दिल में धड़कनों सा उभर जाना।

तू गया छोड़ के ऐसे कि कोई शिकवा न रहा,
बस सिखा गया मुझे ख़ुद में ही हर रोज़ बिखर जाना।

अब तो आदत सी है तन्हाइयों से बात करने की,
जैसे वीराने को आता हो खुद से ही सँवर जाना।

"ख़ामोश" दिल ने तुझे चाहा था इतनी शिद्दत से,
कि तेरा दूर भी रहकर मेरे अंदर ही ठहर जाना।


✍🏿 शिवा
115001
💔🥀

हर एक शख़्स ने “अपना” कह कर किनारा कर लिया,
मैं सोचता ही रह गया — ये क्या माजरा कर लिया।

जो लोग मेरी ज़ात में शामिल थे साँसों की तरह,
वक़्त ने कैसे उन्हें मुझसे जुदा कर लिया।

मैंने हर रिश्ते को दिल की तरह सींचा था मगर,
सब ने अहसास को जैसे कोई तमाशा कर लिया।

अब किसे अपना कहूँ, किसको पराया समझूँ,
सब ने चेहरे पे नया एक ही नक़ाब कर लिया।

वो जो कहते थे कि मर जाएँगे मेरे बिन भी कभी,
आज उन्हीं लोगों ने जीने का हुनर पा कर लिया।

अब तो तन्हाई ही “शिवा” मेरी हमराज़ बनी,
हर किसी ने मुझे “अपना” कह के तन्हा कर लिया।

✍🏿 शिवा
117002
💔🥀

मैं वहाँ आ बैठा हूँ जहाँ अब दिल भी अजनबी लगता है,
रिश्तों का हर एक धागा जैसे बस धुँधला-सा धागा लगता है।

प्यार की बातें सुनता हूँ तो हँसी खुद-ब-खुद आ जाती है,
जैसे कोई मासूम खिलौना, टूटा हुआ बस धागा लगता है।

सपनों की चादर ओढ़ी थी, रातों को चैन से सोने को,
अब हर एक ख़्वाब अधूरा, आँखों में जैसे धुआँ लगता है।

भरोसे की वो मीठी बातें, जो दिल को सुकून दिया करती थीं,
अब हर एक लफ़्ज़ में जैसे कोई छुपा हुआ धोखा लगता है।

हमने तो चाहा था दिल से, हर रिश्ता सच्चा, पाक रहे,
पर हर चेहरा अब हमको बस इक नक़ाब-सा लगता है।

ये कैसी राह पे आ बैठे, खुद से भी रिश्ता टूट गया,
अब अपना ही साया भी जैसे कोई अजनबी साया लगता है।


✍🏿 शिवा
136004
💔🥀

ये रात मुझसे मेरा सबूत माँगने आई है,
कहती है — “दर्द सच है तो लहू दिखा दे।”

वही तारीख़, वही ठंड, वही लहजा लौटा है,
लगता है वक़्त भी मेरा क़त्ल दुहराने आया है।

मैं चीखा था बहुत अंदर, मगर गला नहीं फटा,
ये शहर शोर सुनता है, दर्द नहीं सुन पाता है।

कमरे में पड़ी चीज़ें भी मुझसे नज़रें चुराती हैं,
आईना पूछता है — “तू रोज़ क्यों मर जाता है?”

मैंने खुद को हर रिश्ते में पूरा सौंप दिया,
और बदले में हर बार खाली हाथ रह जाता है।

सांसें चल तो रही हैं, पर वजह खो चुकी हैं,
दिल धड़कता है जैसे कोई बोझ ढोता जाता है।

अगर आज वो भी उसी बेरुख़ी से बात करे,
तो कुछ नहीं टूटेगा —
क्योंकि सब पहले ही टूट चुका है।

ये लड़का बाहर से शांत है, अंदर क़ब्रिस्तान,
जहाँ हर ख्वाब अपने नाम का पत्थर लगाता है।

कोई पूछे — “ज़िंदा हो?”
तो बस इतना कहना,
हाँ…
मगर बहुत देर से।


✍️ शिवा
129002
💔🥀

वो साथ छोड़ के ऐसे मुकर गया,
मैं हाथ थामे रहा, वो बिखर गया।

कल तक जो नाम था मेरी हर बात में,
आज अजनबी सा दिल से उतर गया।

कुछ वादे थे जो धड़कनों में बस गए,
वो एक पल में सब कुछ ही कर गया।

मैं पूछता ही रहा वजह जुदाई की,
वो ख़ामोशियों में जवाब भर गया।

जो हँस के कहता था “तू ही मेरी दुनिया”,
वही किसी और की दुनिया संवर गया।

मैं टूट कर भी उसे ही सोचता रहा,
वो बेख़बर सा कहीं और ठहर गया।

अब हाल-ए-दिल भी छुपता नहीं मुझसे,
हर शेर में दर्द बनकर उभर गया।

✍🏿 शिवा
146002
💔🥀

तेरे ही एहसास में जलकर भी देख लिया,
खुद को तेरे नाम से ढलकर भी देख लिया।

एक तेरे होने का भरम था दिल के अंदर,
उस भरम को सच समझकर भी देख लिया।

माँगी थी मोहब्बत हमने झुक-झुक कर बहुत,
आँखों से अपनी अश्क बहाकर भी देख लिया।

कोई नहीं सुनता यहाँ टूटे दिल की सदा,
हमने हर दर पे जाकर भी देख लिया।

जिसको चाहा था जान से ज्यादा कभी,
उसे अपना बनाकर भी देख लिया।

फिर भी खाली ही रहा ये दिल का जहाँ,
सब कुछ पाकर भी खोकर भी देख लिया।



✍🏿 शिवा
142003

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